सनातन धर्म हिंदू धर्म का ही वैकल्पिक नाम है जिसका उपयोग संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं में भी किया जाता है। वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिए 'सनातन धर्म' नाम मिलता है। 'सनातन' का अर्थ है - शाश्वत या 'सदा बना रहने वाला', अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त। बड़े पैमाने में धर्मान्तरण के उपरांत भी विश्व के अनेको जगहों पर बहुसंख्यक जनसंख्या इसी धर्म में आस्था रखती है। ॐ सिर्फ एक उच्चरण ही नहीं बल्कि सनातन धर्म का एक पवित्र शब्द है।
सनातन धर्म जिसे हिन्दू धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहा जाता है। भारत (और आधुनिक पाकिस्तानी क्षेत्र) की सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिह्न मिलते हैं। इनमें एक अज्ञात मातृदेवी की मूर्तियाँ, शिव पशुपति जैसे देवता की मुद्राएँ, लिंग, पीपल की पूजा, इत्यादि प्रमुख हैं। इतिहासकारों के एक दृष्टिकोण के अनुसार इस सभ्यता के मध्य काल के दौरान मध्य एशिया से एक अन्य जाति का आगमन हुआ, जो स्वयं को आर्य कहते थे और संस्कृत नाम की एक हिन्द यूरोपीय भाषा बोलते थे। एक अन्य दृष्टिकोण के अनुसार सिन्धु घाटी सभ्यता के लोग स्वयं ही आर्य थे और उनका मूलस्थान भारत ही था। कई स्त्रोतों अथवा खुदाई में मिले मंदिर, स्मारक अथवा खोजो से ज्ञात होता है, कि यह सनातन धर्म 1,96,08,53,115 वर्ष पुराना और अधिक विज्ञानीन धर्म है।
सनातन धर्म की गुत्थियों को देखते हुए कई बार इसे कठिन और समझने में मुश्किल धर्म समझा जाता है। हालांकि, सच्चाई तो ऐसी नहीं है, फिर भी इसके इतने आयाम, इतने पहलू हैं कि लोगबाग कई बार इसे लेकर भ्रमित हो जाते हैं। सबसे बड़ा कारण इसका यह कि सनातन धर्म किसी एक दार्शनिक, मनीषा या ऋषि के विचारों की उपज नहीं है, न ही यह किसी ख़ास समय पैदा हुआ। यह तो अनादि काल से प्रवाहमान और विकासमान रहा। साथ ही यह केवल एक दृष्टा, सिद्धांत या तर्क को भी वरीयता नहीं देता।